कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों…
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खुशबू भी वो जो कि गमके गगन में
फुलों से महके और बहके पवन में…
बहकते थीरकते हवाओं से कहते
फैली है खुशबू अब सबके मन में।
*
नहीं एक शब्दों की बोली चले अब
खुशबू से प्रतिभा झलकने लगी है
वर्षों की मेहनत को वो भांप लेंगे
महफिल में अब रंग जमने लगी है।
*
एकत्रित प्रमानों की पत्रों की ढेरी
उन सुर्खियों में ही अपनी तिजोरी।
हर सुर्खी मे वर्णित अपनी कहानी
शरारत के पन्नों की है क्या निशानी?
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फुलों से महके और बहके पवन में…
बहकते थीरकते हवाओं से कहते
फैली है खुशबू अब सबके मन में।
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नहीं एक शब्दों की बोली चले अब
खुशबू से प्रतिभा झलकने लगी है
वर्षों की मेहनत को वो भांप लेंगे
महफिल में अब रंग जमने लगी है।
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एकत्रित प्रमानों की पत्रों की ढेरी
उन सुर्खियों में ही अपनी तिजोरी।
हर सुर्खी मे वर्णित अपनी कहानी
शरारत के पन्नों की है क्या निशानी?
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मगर वेशभूषा भी एक आवश्यक फ़रमान है
आप सुन्दर व आकर्षक हैं तो बड़ा ही मान है
व्यवहार में सदाचार हो तो आपका कल्यान है
और मेहनती छात्रों के लिए इनाम ही इनाम है।
*
अंदर की रौनक से जब खिलखिलाते हों आप
तजुर्बा की खातिर जब बची न हो कोई शाख
Electives अगर हों आपके अपने ही हाथ…
तो कल आपका है अन्यत्र सब बकवास।
*
नौकरी उनका नहीं जो नौकरशाही में अटके हैं
यह उनका है जो अपने कर्म ग्रंथ से महके हैं
ज्ञान और विज्ञान रूपी नौका में तरते हुए…
वे स्वच्छ भाव से अध्यायों की पूर्ति करते हैं।
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मगर वेशभूषा भी एक आवश्यक फ़रमान है
आप सुन्दर व आकर्षक हैं तो बड़ा ही मान है
व्यवहार में सदाचार हो तो आपका कल्यान है
और मेहनती छात्रों के लिए इनाम ही इनाम है।
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अंदर की रौनक से जब खिलखिलाते हों आप
तजुर्बा की खातिर जब बची न हो कोई शाख
Electives अगर हों आपके अपने ही हाथ…
तो कल आपका है अन्यत्र सब बकवास।
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नौकरी उनका नहीं जो नौकरशाही में अटके हैं
यह उनका है जो अपने कर्म ग्रंथ से महके हैं
ज्ञान और विज्ञान रूपी नौका में तरते हुए…
वे स्वच्छ भाव से अध्यायों की पूर्ति करते हैं।
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इससे पहले की आगे एक कदम भी बढ़ाऊ
पहले एक छोटा सा संक्षेप दे जाऊं।
जिस भी पुस्तक का मैं अध्याय सम्भालुं
अंततः उसका निर्देशक बन जाऊं!
*
जी हाँ! पुस्तक का शीर्षक यदि कम्पनी का नाम है
तो पुरी की पुरी पुस्तक एक कम्पनी समान है।
नौकरी, नौकरी नहीं किसी अध्याय का भाव है…
और हमारी सेवा इसके लिए नया पड़ाव है।
*
पुस्तक का लेखक हीं कम्पनी का निर्देशक है
और भिन्न-भिन्न अध्याय पर हमें एक ऑफर है
कालेज में प्रशिक्षित होते हैं हम युवा राइटर
क्या हम लिख पाएंगे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर?
इससे पहले की आगे एक कदम भी बढ़ाऊ
पहले एक छोटा सा संक्षेप दे जाऊं।
जिस भी पुस्तक का मैं अध्याय सम्भालुं
अंततः उसका निर्देशक बन जाऊं!
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जी हाँ! पुस्तक का शीर्षक यदि कम्पनी का नाम है
तो पुरी की पुरी पुस्तक एक कम्पनी समान है।
नौकरी, नौकरी नहीं किसी अध्याय का भाव है…
और हमारी सेवा इसके लिए नया पड़ाव है।
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पुस्तक का लेखक हीं कम्पनी का निर्देशक है
और भिन्न-भिन्न अध्याय पर हमें एक ऑफर है
कालेज में प्रशिक्षित होते हैं हम युवा राइटर
क्या हम लिख पाएंगे पूछे गए प्रश्नों के उत्तर?
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